टिमटिमाते तारे
रोजाना की तरह आज भी काजल स्कूल का काम पूरा करके घर की छत की तरफ भागी। खुले आसमान में तारों को देख कर उसका चेहरा खिल उठा। आसमान तारों से जगमगा रहा था मानो किसी ने सारे आकाश में जुगनू बिखेर दिए हो। आकाश में टिमटिमाते हुए तारों को देखकर उसका मन रोमांचित हो गया और वह खुशी से खिल उठी। 11 साल की काजल को लगता था इन तारों में से कोई परी आएगी और उसके मन की सारी इच्छा पूरी कर देगी। जैसे ही कोई तारा तेज टिमटिमाने लगता काजल अपने मन की इच्छा है उसे बोलने लगती। अभी नीचे से आवाज आती है "काजल सोना नहीं है क्या सुबह स्कूल भी जाना है।" अपनी मां की आवाज सुनकर काजल मन मार कर चली जाती है और सो जाती है। तारों से बातचीत का यह सिलसिला कई साल तक चलता रहता है। अब काजल 11 साल के बच्ची नहीं बल्कि 21 साल की युवती हो गई है और अब उसकी इच्छाएं तारों से गुड़िया या खिलौने मांगने की नहीं रही। उसकी उम्र के साथ उसकी इच्छाएं भी जवान हो गई थी। उम्र के इस बदलाव को नजर में रखते हुए उसके माता पिता ने उसकी शादी करने का फैसला किया। समय बीतता गया ।माता -पिता और तारों के बीच में चुलबुली सी काजल अपनी जिंदगी बिता रही थी।...