औरत या जरूरत

 दुनिया का हर एक रिश्ता अपनी जरूरत से बंधा है, जैसे ही जरूरत खत्म होती है वैसे ही रिश्ता भी दम तोड़ देता है। इस समाज को औरत की जरूरत हमेशा से रही है चाहे वह मां के रूप में हो चाहे पत्नी के रूप में, चाहे बेटी या बहन के रूप में हो लेकिन यह पुरुष जाति हमेशा से औरत जाति की कर्जदार रहेंगी।



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